टेक्नोलॉजी

AI से बढ़ा UPI फ्रॉड का खतरा, डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा पर बढ़ रहा खर्च

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026

भारत में UPI ने डिजिटल भुगतान को बेहद आसान और तेज बना दिया है, लेकिन अब इसी तेजी के साथ साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.

Artificial Intelligence यानी AI के इस्तेमाल से साइबर अपराधी अब पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद दिखने वाले संदेश, कॉल और पहचान की नकल तैयार कर सकते हैं।

हालिया रिपोर्टों में UPI से जुड़े प्लेटफॉर्म और उद्योग के सामने बढ़ते security infrastructure costs को लेकर चिंता सामने आई है। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार UPI लेनदेन की सुरक्षा से संबंधित infrastructure पर प्रति transaction करीब 10 से 20 पैसे तक का खर्च आता है। जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे fraud detection, monitoring और cyber defence पर निवेश की आवश्यकता भी बढ़ रही है।

AI ने साइबर अपराधियों को बनाया ज्यादा खतरनाक

पहले साइबर ठगी में नकली SMS, ईमेल या सामान्य phishing links का इस्तेमाल ज्यादा देखने को मिलता था। अब AI की मदद से ठग किसी व्यक्ति की आवाज की नकल, ज्यादा विश्वसनीय भाषा और व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल करके लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार voice cloning, deepfake-based impersonation और AI-assisted phishing जैसी तकनीकें डिजिटल भुगतान के लिए नई चुनौती बन रही हैं। UPI की खासियत इसकी instant payment सुविधा है, लेकिन यही तेजी fraud होने की स्थिति में पैसे को रोकने या वापस पाने का समय भी कम कर देती है।

अब AI से ही AI का मुकाबला

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में AI केवल खतरा नहीं है। बैंक, payment platforms और security teams भी artificial intelligence और behavioural analytics जैसी तकनीकों का इस्तेमाल संदिग्ध transactions और असामान्य user behaviour पहचानने के लिए कर रहे हैं।

भारत की Computer Emergency Response Team (CERT-In) ने भी frontier AI systems से जुड़े बढ़ते cyber risks को लेकर चेतावनी दी है। उसके अनुसार कुछ आधुनिक AI systems बड़ी मात्रा में software का विश्लेषण कर vulnerabilities खोजने और multi-stage cyber attacks की planning को तेज कर सकते हैं।

आम UPI यूजर क्या सावधानी बरतें?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI PIN, OTP या बैंकिंग credentials साझा न करें। किसी payment request को approve करने से पहले receiver का नाम और रकम ध्यान से जांचें तथा अनजान links या APK files को डाउनलोड करने से बचें।

इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति फोन पर जल्दबाजी या डर पैदा करके payment करने के लिए दबाव बनाए, तो बातचीत रोककर संबंधित बैंक या आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना ज्यादा सुरक्षित है।

निष्कर्ष

UPI भारत की digital economy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। अब अगली चुनौती केवल ज्यादा digital payments करने की नहीं, बल्कि उन्हें तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने की है। AI जहां साइबर अपराधियों की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं यही तकनीक fraud detection और digital security को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Back to top button