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सहारनपुर की अनोखी गौशाला में गोबर से बन रहीं इको-फ्रेंडली राखियां, मिट्टी में डालने पर उगेगी तुलसी

पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ रक्षाबंधन की तैयारी, मात्र 10 रुपये में मिल रही है बीज युक्त स्वदेशी राखी

सहारनपुर। रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों से जोड़ते हुए सहारनपुर की मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला ने एक अनूठी पहल की है। नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में संरक्षित गोवंश के गोबर से विशेष राखियां तैयार की जा रही हैं। इन राखियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तुलसी के बीज शामिल किए गए हैं। राखी के उपयोग के बाद इसे मिट्टी, गमले या क्यारी में डालने पर अनुकूल परिस्थितियों में तुलसी का पौधा उग सकता है।

यह पहल पारंपरिक राखियों के विकल्प के रूप में एक बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद प्रस्तुत करती है। गौशाला प्रशासन का कहना है कि इन राखियों की कीमत केवल 10 रुपये रखी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इन्हें खरीद सकें।

550 से अधिक निराश्रित गोवंश का संरक्षण

मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला में शहर की सड़कों पर घूमने वाले बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। यहां मौजूद गोवंश के गोबर और गोमूत्र का उपयोग विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जाता है। गौशाला अपने नवाचारों और गौ-आधारित उत्पादों के कारण पहले भी चर्चा में रही है।

गौशाला में तैयार किए जा रहे उत्पादों के माध्यम से गोवंश के भरण-पोषण के लिए संसाधन जुटाने और गौशाला को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

गोबर के साथ तुलसी के बीज का प्रयोग

रक्षाबंधन के लिए तैयार की गई इन विशेष राखियों में देसी गाय के गोबर के साथ तुलसी के बीज मिलाए गए हैं। इसका उद्देश्य राखी को केवल एक त्योहार तक सीमित न रखकर उसे प्रकृति और हरियाली से जोड़ना है।

राखी बांधने के बाद इसे फेंकने के बजाय मिट्टी में डालकर एक नए पौधे को जन्म देने का संदेश दिया जा रहा है। इस तरह यह राखी “राखी से पौधा” की सोच को आगे बढ़ाती है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक्री

गौशाला प्रशासन के अनुसार, इन इको-फ्रेंडली राखियों की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जा रही है। उत्पाद की मांग सहारनपुर के अलावा अन्य स्थानों से भी आने की बात कही जा रही है।

इस पहल को स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौशाला का मानना है कि प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों से बने उत्पाद पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नवाचारों को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं उत्पादों की सराहना

मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला अपने गौ-आधारित उत्पादों और नवाचारों के कारण विशेष पहचान बना चुकी है। गौशाला प्रशासन के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां तैयार किए जा रहे उत्पादों और नवाचारों की सराहना कर चुके हैं।

पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप कुमार मिश्रा ने बताया कि गौशाला में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के साथ उनके गोबर और गोमूत्र से उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर लगातार काम किया जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर तुलसी के बीज युक्त गोबर की राखियां इसी प्रयास की एक नई कड़ी हैं।

उन्होंने बताया कि राखी पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक रूप से नष्ट होने योग्य सामग्री पर आधारित है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

₹10 की राखी में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

आज के दौर में जब त्योहारों में प्लास्टिक और अन्य गैर-जैविक सामग्री का इस्तेमाल बढ़ रहा है, सहारनपुर की यह पहल एक अलग संदेश देती है। मात्र 10 रुपये की इस राखी में रक्षाबंधन की परंपरा, गौ-आधारित नवाचार और पौधारोपण की सोच को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

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