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जानते हैं!! आज 20 मार्च : विश्व गौरैया दिवस है…

 

जी! आज विश्व गौरैया दिवस है। एक छोटी सी चिड़िया के नाम आज का दिन उसके संरक्षण के लिए किया गया है। ह्यूमन फ्रेंडली इस जीव के लिए वरिष्ठ रचनाकार राकेश धर द्विवेदी की कुछ खूबसूरत पंक्तियाँ हैं जिसे आपके साथ यहां इस विषय पर साझा कर रहा हु, क्योंकि ये मुझे बहुत भातीं हैं, आप भी पढ़ें…

हरे-भरे पेड़ों पर फुदकती गौरेया
घर के मुंडेर पर थिरकती गौरेया
स्मृति में बस जाती है 🕊🕊
घर के चौखट पर नन्ही-सी गुड़िया।

कहते हैं किसी भी “प्रजाति को खत्म करना हो तो उसके संस्कार / माहौल, आवास और उसके भोजन को खत्म कर दो” वो स्वतः समाप्त हो जाएगी।

कुछ ऐसा भी हुआ बेचारी गौरैया के साथ…

शहरीकरण, गांवों का बदलता स्वरूप, कृषि में रसायनिक खादें एंव जहरीले कीटनाशक गौरैया के खत्म होने के लिए जिम्मेंदार बने। फ़िर भी प्रकृति ने हर जीव को विपरीत परिस्थितियों में जिन्दा रहने की काबिलियत दी है और यही वजह है कि गौरैया कि चहक आज भी हम थोड़ी बहुत सुन पा रहे हैं। लेकिन वो वजह हमारी नहीं, दैवीय है।

कभी खुले आंगन में फ़ुदकने वाली यह चिड़िया, छप्परों में घोसले बनाने वाली यह चिड़िया, बच्चों के हाथों से गिरी हुई झूठन (पकाया हुआ अनाज) खाने वाली चिड़िया, अब बन्द जाली के आंगनों और बन्द दरवाजों और गगन चुम्बी वातानुकूलित इमारतों की वजह से अपनी दस्तक नही दे पाती हमारे घरों में, गाहे-बगाहे अगर यह दाखिल भी होती है, तो छतों में टंगे पंखों से टकरा कर मर जाती है। बड़ा दर्दनाक है यह सब जो इस अनियोजित विकास के दौर में हो रहा है, हम अपने आस-पास सदियों से रह रहे तमाम जीवों के लिए कब्रगाह तैयार करते जा रहे है बिना यह सोचे कि इनके बिना यह धरती और हमारा पर्यावरण कैसा होगा।

घरेलू होती है गौरैया।
घरेलू गौरैया (पासर डोमेस्टिकस) एक ऐसा पक्षी है जो यूरोप और एशिया में सामान्य रूप से हर जगह पाई जाती है। कहते हैं पूरे विश्व में जहाँ-जहाँ मनुष्य गया इसने उनका अनुकरण किया और अमरीका के अधिकतर स्थानों, अफ्रीका के कुछ स्थानों, न्यूज़ीलैंड और आस्ट्रेलिया तथा अन्य नगरीय बस्तियों में अपना घर बनाया। शहरी इलाकों में गौरैया की छह तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं।

वो ये हैं –

हाउस स्पैरो,
स्पेनिश स्पैरो,
सिंड स्पैरो,
रसेट स्पैरो,
डेड सी स्पैरो और
ट्री स्पैरो।

इनमें हाउस स्पैरो को गौरैया कहा जाता है। यह शहरों में ज्यादा पाई जाती हैं। आज भी यह विश्व में सबसे अधिक पाए जाने वाले पक्षियों में से एक बताई जाती है। जानकर मानते हैं कि आदम जात जहाँ भी घर बनाते हैं देर सबेर गौरैया के जोड़े वहाँ रहने पहुँच ही जाते हैं। लेकिन पर्यावरण असंतुलन और शहरीकरण इस प्रजाति को काफी नुकसान पहुचा रहा है जिसपर हम सबको ध्यान देना होगा और इसी लिए 20 मार्च विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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