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सुप्रीम कोर्ट सख्त: अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग पर तेज होगी कार्रवाई

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कानून के शासन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।

हर मामले में तथ्यों की जांच जरूरी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े कई अवमानना मामलों को संबंधित हाईकोर्टों के पास भेजने का निर्देश दिया। अदालत का कहना था कि अलग-अलग मामलों में तथ्य और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड और कार्रवाई की जांच जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी संपत्ति पर वास्तव में अवैध निर्माण है तो उसे हटाने के लिए वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल किसी आपराधिक मामले में आरोपी होने के आधार पर उसकी संपत्ति को दंड के तौर पर गिराना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया अहम

नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में अवैध निर्माण गिराने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना, अपना पक्ष रखने का अवसर देना और आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का पर्याप्त मौका देना शामिल है।

अदालत ने यह सिद्धांत भी स्पष्ट किया था कि कार्यपालिका स्वयं किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करके उसके घर को सजा के तौर पर नहीं गिरा सकती।

अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पर रोक नहीं

सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख को इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। अदालत ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने की वैध कार्रवाई के अधिकार को स्वीकार किया है, लेकिन इसके लिए कानून, नोटिस, सुनवाई और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

यानी प्रशासन यदि किसी निर्माण को अवैध पाता है तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है, लेकिन कार्रवाई मनमाने तरीके से नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट में चुनौती देने का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में बुलडोजर कार्रवाई से संबंधित कुछ मामलों में याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में स्थानीय तथ्यों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है, जिसे हाईकोर्ट बेहतर तरीके से देख सकता है।

बुलडोजर एक्शन’ पर सुप्रीम कोर्ट का संदेश

सुप्रीम कोर्ट के रुख से एक बात स्पष्ट है—अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कानून के तहत हो सकती है, लेकिन कानून से बाहर जाकर नहीं।

प्रशासन को जहां अवैध निर्माण हटाने का अधिकार है, वहीं संपत्ति मालिक को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस, सुनवाई और उपलब्ध न्यायिक उपायों का अधिकार प्राप्त है। इस संतुलन को बनाए रखना ही कानून के शासन की मूल भावना है।

AB News 4U निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मूल संदेश यही है कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई जरूरी हो सकती है, लेकिन कार्रवाई की वैधता उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी भी ध्वस्तीकरण से पहले संबंधित कानून और न्यायिक दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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